Monday, 2 April 2018

Road cum train trip to Munnar

          अब तक आपने पढ़ा मुन्नार के दर्शनीय स्थलों के बारे में!! इस पोस्ट में आपको ले चलते हैं वहाँ की यात्रा पर!! बेस स्टेशन हमेशा की तरह अपना प्यारा बैंगलोर है!!यूँ तो जाने के कई तरीके हैं अपनी कार से भी जा सकते हैं पर इस बार मन रोड ट्रिप का ना हो कर कोचीन तक ट्रेन से जाने का है!! हर बार कुछ अलग तरह के अनुभव होने चाहिए ना!! अब बाहर तो हम जाते ही नयेपन के लिए हैं!!

        तो ठीक है इस बार कुछ तूफानी करते है!! बैंगलोर से कोचीन तक ट्रेन में स्लीपर का टिकट करा लिया और अबकी बार हमने पहली बार पैकेज ट्रिप बुक करवाया!! अनुभव तो हर तरह का ही होना चाहिये ना!! अब पैराडाइज हॉलीडेज वालों से बुकिंग करवाई तो चलना तो उनके हिसाब से हो हुआ ना!! उन्होंने बोला कोचीन तक कहाँ जाओगे आलुवा नाम के स्टेशन पर उतर जाना वहीं से चलेंगे क्योंकि यहाँ से मुन्नार की दूरी करीबन सौ किलोमीटर ही रह जायेगी!! तो हम यहीं उतर गए और उनके रिप्रजेंटेटिव हमारे स्वागत के लिए तत्पर खड़े  हो कर हमको नाश्ता पानी करवाने के लिए अपने ऑफिस ले गये!! वहां चना चबैना कर के हमारी सवारी चल पड़ी उन सर्पिलाकार सड़कों पर जिनकी मंजिल मुन्नार जैसी जादुई जगह है!!
         अभी इन सड़कों पर चल ही रहे थे तो पता लगा साउथ के पहाड़ों में भी बड़े घुमाव हैं और रास्तों को देखते देखते कब बेटी को बेचैनी होने लगी पता ही नही लगा!! फिर आगे रुकते रुकते ही जाना  हुआ!!  वैसे पर्वतीय जगहों की हवा में ही एल अलग सी खुशबू होती है जो चाहे अनचाहे आपको अपने साथ जोड़ लेती है!! अभी हम चलते चलते रास्ते मे मद्धम गति से बढ़े जा रहे थे कि वातावरण में पानी की कलकल गुंजायमान होने लगी तो समझ आया आगे झरना आने वाला है!! चेयपारा कुछ अलग सा ही नाम है!!  यहाँ के तो नाम भी ऐसे लगते जैसे कभी सुने ही ना हों पर बड़ा ही सुंदर झरना उस पर नीचे आता दूधिया पानी !! पानी के छीटें अपने स्पर्श से ही अपनी चुबुलाहट से देखने और अनुभव करने वाले को  रूबरू कराने में भरपूर सक्षम जान पड़ रहे हैं!! बहुत बढ़िया अनुभव रहा यहां का!! जाने वाले तो आगे भी जा रहे हैं पर  हम लोग बच्चे को ले कर बहुत ऊपर तक नही गए!! अन्य टूरिस्ट स्पॉट के जैसे यहां पर भी पूरा जुगाड़ पानी है बच्चों के मतलब की चीजें और रसीले फल!! अरे ये क्या अमिया और पाइनएप्पल जैसे रसीले फल भी खट्टे तीखे नमक के साथ मिल रहा है !! देखते ही मुंह मे पानी आ गया!! तो चलिए अब मन मचल ही गया तो जिह्वा देवी को स्वाद का भरपूर आंनद दे दिया जाए!!
            पाइनएप्पल का स्वाद बसा कर हम आगे बढ़ चले और अगले ही दो मोड़ पर वलारा नाम का झरना हमारे लिए अपनी पलके बिछाए खड़ा था!! ये जगह सड़क से दूर होने के कारण हम इसकी अनुभूति तो नही कर पाए क्योंकि वहाँ तक जाने का रास्ता ही नही है लेकिन देख जरूर लिया!! यहाँ पर कुछ ज्यादा खाने पीने की व्यवस्था नहीं है!! यहाँ के नजारे आंखों में हमेशा के लिए बसा के हम आगे बढ़ गये और रास्ते मे अगली मंजिल रही यहाँ के फार्म !! फार्म से मतलब यहां छोटे बड़े फार्म से हैं जिनमे खूब सारे मसाले और आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने के लिए उपयोगी जड़ी बूटियां मिलती है!! याद आया ना केरला को तो आयुर्वेद के लिए भी जाना जाता है!! यहाँ पर हाथी की सवारी भी करवाते हैं पर हम लोगों को थोड़ा महंगा लगा और इससे पहले दुबारे एलीफैंट कैम्प में ये आनंद हम उठा चुके हैं!! तो स्पाइस प्लांटेशन का मजा लेने हम उन्ही लोगो की दो छाता ले कर आगे बढ़े जो  वापस लौट कर उन लोगों को वापस करनी है!! चलते चलते पानी के बहने की आवाज से आभास होने लगा शायद कोई नदी है जो समानान्तर चल रही है पर वो हमें कहीं भी देखने को नही मिली। विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियों और मसाले के पेडों को देख कर हम यहाँ से नीचे उतर लिए जल्दी जल्दी क्योंकि बारिश की बूदें जमीन को भिगोने को मचलने लगी !! उत्तर कर छाते वापस किये मुन्नार की तरफ आगे बढ़ गए!! मुन्नार के पास पहुंचते पहुंचते यहाँ के चाय बागान अपने रंग दिखाने लगे जैसे जैसे ऊपर पहुंचते गए सुंदरता अपने चरम पर पहुंचती गयी!! तो ये था हमारा बैंगलोर से मुन्नार तक का सफर!! आगे की कहानी फिर सुनाएंगे तब तक तस्वीरें और वीडियो देखिये!! वैसे बहुत तस्वीरे आपको इस यात्रा की नही दिखा पाएंगे क्योंकि आजकल अपना रैन बसेरा गुड़गांव में है और हमारे फ़ोटो बैंगलोर में हैं!!
सुहाना सफर और ये मौसम हसीन!!

                          हर पल बदलते नजारे

चारो तरफ बिखरा हरे रंग का मखमली कालीन!! 

अरे चाय की पत्तियां तो यहीं से दिखने लगी!!
कौन होगा वो खुशनसीब जो इस घर का मालिक होगा!!
मन तो कर रहा इस घास के मैदान में चलते चलो दूर तक !!
धान के खेत
बरसात का मौसम शबाब पर लग रहा है!!
              
चेयपारा वॉटरफॉल
 
वलारा में पानी का जोर !!
वलारा वाटरफॉल
                         


3 comments:

  1. अल्मोड़ा की घुमक्कड़ गुरुग्राम में बैठ कर बंगलोर से की गई मुन्नार यात्रा लिख रही है....ग़ज़ब....जिसको पहले मुन्नार जाना है इसे aluva ही अच्छा पड़ता है और जिसको कोचीन जाना है पहले वही कोचीन जाता है....बैंगलोर से फोटो पार्सल मंगवा लो

    ReplyDelete
  2. जल के संगत कीजिये, हरियाली ते हेत |
    मरत भूमि न त होइही चहुँपुर रेतहि रेत ||
    भावार्थ : - हमें जल का संरक्षण के संगत सदैव हरियाली के लिए उत्प्रेरित रहना चाहिए | यदि हरियाली की उपेक्षा की गई तो यह भूमि मृतप्राय होकर जीवन से रहित मरुस्थल में परिवर्तित हो जाएगी तब इसके चारों ओर मिट्टी के स्थान पर रेत ही रेत व्याप्त रहेगी |

    ReplyDelete
  3. बारि बरसात डारि डारि फुर पात अँगना अमराई फरे |
    जर नूपुर गुँजात थरी थरी देखु सखि हरि हरु रँग भरे ||
    खेह खेह भए कनक देह ससि कनि कर मनि मोतिया धरे |
    कंठि माल कटि करधनिया जिमि धरनि के कर कँगना परे ||

    भावार्थ : - हे सखी ईश्वर जलवर्षा कर रहे हैं जिससे दाल दाल पर पत्र पल्ल्वित हो उठे आँगन की अमराइयों में फलित हो गए हैं | जल रूपी नूपुर का मधुर गुंजन कृते हुवे ईश्वर ने प्रत्येक स्थली को हरे रंग से भरकर हरिण्मय कर दिया | अन्न- कणिकाओं के मणि मोतियों को धारण किये खेत की देह मानो स्वरणमयी हो गई है ( अथवा गेहूँ से परिपूर्ण हो गई है ) इन स्वर्णमय खेतों से ऐसा प्रतीत होता है मानो कंठ-माल, करधनी, कंगन धारण कर धरती ने श्रृंगार किया हो |

    ReplyDelete